“अब मैं अपने नीचे छोटे घर तथा बस्ती देख रहा था और मुझे यह जान पड़ता था कि मैं एक विचित्र नगर में उतर रहा हूँ। ठीक मेरे नीचे छोटे-छोटे मनुष्यों का एक समूह एकत्र था, जोकि न तो कुछ शब्द उच्चारण करते और न मेरी सहायता करने पर कुछ उत्साह दिखाते थे, पर मूढ़ों के समान दांत निपोरे मुंह बाये खड़े थे और मुझे तथा मेरे बलून को ध्यानपूर्वक देख रहे थे। मैं ग्लानि से उनकी ओर से नेत्र फेर लिया और ऊपर की ओर अपनी पृथ्वी को देखने लगा, जोकि इस समय एक बड़े तांबे के तथा धुंधली ढ़ाल के समान कोई दो अंश व्यास में दिखाई दे रही थी।”
यह अंश बाबू केशव प्रसाद सिंह द्वारा रचित विज्ञान कथा “चंद्रलोक की यात्रा” का है, जो “सरस्वती” के जून 1900 के अंक में प्रकाशित हुई थी। उक्त कहानी में लेखक द्वारा चंद्रमा पर जाने का रोचक वर्णन है। हालाँकि केशव प्रसाद सिंह ने चंद्रमा पर मानवों की बस्ती को दर्शाया है, जोकि वैज्ञानिकों द्वारा गलत साबित की जा चुकी है।
आपको 20 जुलाई 1969 का वह दिन शायद याद हो, जब अमेरिकी अंतरिक्ष यान अपोलो-11 के कमाण्डर नील आर्मस्ट्रांग ने पहले मानव के रूप में चंद्रमा की धरती पर कदम रखे थे। वह दिन भारतीय वैज्ञानिकों के लिए एक स्वप्न जगाने वाला दिन था। और उस स्वप्न को हकीकत में बदलने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। हालाँकि अभी भारत द्वारा जो अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर भेजा गया है, वह मानव रहित है, पर जल्दी ही किसी भारतीय वैज्ञानिक को भी चंद्रमा की धरती पर कदम रखने का मौका भी प्राप्त होगा।
चंद्रयान-1 हालाँकि अभी भारतीय वैज्ञानिक दल की एक शुरूआत मात्र है। पर इसके जो परिणाम आएंगे, वे चंद्र मिशन को गति देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। चंद्रमा की धरती पर कॉलोनियाँ बसाने की कल्पना अभी भले ही कुछ लोगों को दूर की कौड़ी लग रही हो, पर एक न एक दिन वह सपना भी साकार होगा। और तब हर भारतीय चंद्रमा की धरती पर किसी भारतीय के पहुंचने की घटना को सिर्फ किस्से कहानियों में नहीं पढ़ेगा, बल्कि जीवंत रूप में उसका गवाह भी बनेगा।
हर भारतवासी को उस गौरवशाली क्षण का इंतजार रहेगा।
23 comments:
great work
keep writing
regards
सच कहा आपने, जल्दी ही वो सपना भी सच होगा।
बेहतरीन तहरीर है...लिखती रहें...
सरल शब्दों में विज्ञानं की जानकारी देने का अच्छा प्रयास है आपका. बधाई.
अच्छी बात बताई आपने, यह सुनकर और अच्छा लगा कि यह बात १९०० में ही सोची जा चुकी थी, वह भी भारत में.
जो सपना देखा गया वह पूरा भी जल्द होने वाला है इस से बढ़िया बात और क्या हो सकती है ...सरल लफ्जों में आपने अपनी बात कही ...
कुछ ओर दिलचस्प किस्से भी बताईये ...अगली कडियों में विज्ञान से जुड़े
धन्यवाद
ye hui na baat, narayan narayan
हमे उस गौरवशाली क्षण का बेसब्री से इंतजार है... आपका ब्लॉग बहुत बढ़िया है.. निरंतर लिखने के लिए शुभकामनाए
very good
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
लिखते रहिए, लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
ब्लोगिंग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लिखते रहिये. दूसरों को राह दिखाते रहिये. आगे बढ़ते रहिये, अपने साथ-साथ औरों को भी आगे बढाते रहिये. शुभकामनाएं.
--
साथ ही आप मेरे ब्लोग्स पर सादर आमंत्रित हैं. धन्यवाद.
Beshak
हम सबको इंतज़ार है
आप की प्रस्तुति को सलाम
बहुत अच्छा िलखा है आपने ।
http://www.ashokvichar.blogspot.com
सपना भी सच होगा।
बड़ी सहजता से तहरीर लिखती हैं आप....जारी रखें....अपनी लेखन यात्रा.....चाँद पर भी और दीगर पर भी.....इंतजार रहेगा.
dhnyabad, bahot hi sundar prastuti,
ab nayi jankari dijiye
meri nai post agar wqat ho to padhen
arshiya, ye dhartee kaise rahne layak bani rahe, ye badi fikr kee baat hai. varna dhartee ko tabah kar chal dengechand ke tarf
good, keep it up
again good post
Shyari Is Here Visit Jauru Karo Ji
http://www.discobhangra.com/shayari/sad-shayri/
Etc...........
लगता है आपने चांद पर प्लाट ले लिया फिर भी एकाधबार इस प्लानेट को भी कृतार्थ कर दिया करें
नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएँ!
Post a Comment