11/06/2008

चंद्रमा की धरती पर पड़े भारतीय के कदम

अब मैं अपने नीचे छोटे घर तथा बस्ती देख रहा था और मुझे यह जान पड़ता था कि मैं एक विचित्र नगर में उतर रहा हूँ। ठीक मेरे नीचे छोटे-छोटे मनुष्यों का एक समूह एकत्र था, जोकि न तो कुछ शब्द उच्चारण करते और न मेरी सहायता करने पर कुछ उत्साह दिखाते थे, पर मूढ़ों के समान दांत निपोरे मुंह बाये खड़े थे और मुझे तथा मेरे बलून को ध्यानपूर्वक देख रहे थे। मैं ग्लानि से उनकी ओर से नेत्र फेर लिया और ऊपर की ओर अपनी पृथ्वी को देखने लगा, जोकि इस समय एक बड़े तांबे के तथा धुंधली ढ़ाल के समान कोई दो अंश व्यास में दिखाई दे रही थी।


यह अंश बाबू केशव प्रसाद सिंह द्वारा रचित विज्ञान कथा चंद्रलोक की यात्रा का है, जो सरस्वती के जून 1900 के अंक में प्रकाशित हुई थी। उक्त कहानी में लेखक द्वारा चंद्रमा पर जाने का रोचक वर्णन है। हालाँकि केशव प्रसाद सिंह ने चंद्रमा पर मानवों की बस्ती को दर्शाया है, जोकि वैज्ञानिकों द्वारा गलत साबित की जा चुकी है।


आपको 20 जुलाई 1969 का वह दिन शायद याद हो, जब अमेरिकी अंतरिक्ष यान अपोलो-11 के कमाण्डर नील आर्मस्ट्रांग ने पहले मानव के रूप में चंद्रमा की धरती पर कदम रखे थे। वह दिन भारतीय वैज्ञानिकों के लिए एक स्वप्न जगाने वाला दिन था। और उस स्वप्न को हकीकत में बदलने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। हालाँकि अभी भारत द्वारा जो अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर भेजा गया है, वह मानव रहित है, पर जल्दी ही किसी भारतीय वैज्ञानिक को भी चंद्रमा की धरती पर कदम रखने का मौका भी प्राप्त होगा।


चंद्रयान-1 हालाँकि अभी भारतीय वैज्ञानिक दल की एक शुरूआत मात्र है। पर इसके जो परिणाम आएंगे, वे चंद्र मिशन को गति देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। चंद्रमा की धरती पर कॉलोनियाँ बसाने की कल्पना अभी भले ही कुछ लोगों को दूर की कौड़ी लग रही हो, पर एक न एक दिन वह सपना भी साकार होगा। और तब हर भारतीय चंद्रमा की धरती पर किसी भारतीय के पहुंचने की घटना को सिर्फ किस्से कहानियों में नहीं पढ़ेगा, बल्कि जीवंत रूप में उसका गवाह भी बनेगा।


हर भारतवासी को उस गौरवशाली क्षण का इंतजार रहेगा।

23 comments:

makrand said...

great work
keep writing
regards

कविता said...

सच कहा आपने, जल्दी ही वो सपना भी सच होगा।

फ़िरदौस ख़ान said...

बेहतरीन तहरीर है...लिखती रहें...

Abhishek said...

सरल शब्दों में विज्ञानं की जानकारी देने का अच्छा प्रयास है आपका. बधाई.

COMMON MAN said...

अच्छी बात बताई आपने, यह सुनकर और अच्छा लगा कि यह बात १९०० में ही सोची जा चुकी थी, वह भी भारत में.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

जो सपना देखा गया वह पूरा भी जल्द होने वाला है इस से बढ़िया बात और क्या हो सकती है ...सरल लफ्जों में आपने अपनी बात कही ...

डॉ .अनुराग said...

कुछ ओर दिलचस्प किस्से भी बताईये ...अगली कडियों में विज्ञान से जुड़े

राज भाटिय़ा said...

धन्यवाद

नारदमुनि said...

ye hui na baat, narayan narayan

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

हमे उस गौरवशाली क्षण का बेसब्री से इंतजार है... आपका ब्लॉग बहुत बढ़िया है.. निरंतर लिखने के लिए शुभकामनाए

रचना गौड़ ’भारती’ said...

very good
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
लिखते रहिए, लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।

Amit K. Sagar said...

ब्लोगिंग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लिखते रहिये. दूसरों को राह दिखाते रहिये. आगे बढ़ते रहिये, अपने साथ-साथ औरों को भी आगे बढाते रहिये. शुभकामनाएं.
--
साथ ही आप मेरे ब्लोग्स पर सादर आमंत्रित हैं. धन्यवाद.

योगेन्द्र मौदगिल said...

Beshak
हम सबको इंतज़ार है
आप की प्रस्तुति को सलाम

dr. ashok priyaranjan said...

बहुत अच्छा िलखा है आपने ।
http://www.ashokvichar.blogspot.com

Dr. Nazar Mahmood said...

सपना भी सच होगा।

समीर यादव said...

बड़ी सहजता से तहरीर लिखती हैं आप....जारी रखें....अपनी लेखन यात्रा.....चाँद पर भी और दीगर पर भी.....इंतजार रहेगा.

भवेश झा said...

dhnyabad, bahot hi sundar prastuti,

makrand said...

ab nayi jankari dijiye
meri nai post agar wqat ho to padhen

Ek ziddi dhun said...

arshiya, ye dhartee kaise rahne layak bani rahe, ye badi fikr kee baat hai. varna dhartee ko tabah kar chal dengechand ke tarf

"VISHAL" said...

good, keep it up

Jimmy said...

again good post


Shyari Is Here Visit Jauru Karo Ji

http://www.discobhangra.com/shayari/sad-shayri/

Etc...........

योगेन्द्र मौदगिल said...

लगता है आपने चांद पर प्लाट ले लिया फिर भी एकाधबार इस प्लानेट को भी कृतार्थ कर दिया करें

विनय said...

नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएँ!